दो बीते पल .

दो बीते पल, पलकों को बार बार छू जाते हैं.
दो हसीन लम्हें, होंठों पर मुस्कुराहट ले आते हैं.

किसी किताब में पड़े सूखे फूल जैसी
मुरझाई हुई सी यादें हैं.
दिल के किसी कोने में दफ़्न ,
घबराई हुई सी यादें हैं.

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एक ख्वाब सी ज़िंदगी .

कभी कभी एक ख्वाब सी लगती है ज़िंदगी.
ना जाने किस राह पर चले जाते हैं.
एक लम्बी रात सी लगती है ज़िंदगी.

खुदसे हम कुछ बातें कहते हैं,
खुदसे कुछ छुपाते हैं.
खुदसे खुद के खुदा को,
खुदसे दूर ले जाते हैं.

बिखरे पत्तो से हैं ज़िंदगी के पन्ने.
बेजान हैं, मगर खूबसूरत .
जैसे धूल में बिखरी
किसीके खुदा कि मूरत.