सोचा था तुम चले जाओगे तो…

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सोचा था तुम चले जाओगे
तो सब कुछ बदल जाएगा.
मगर ये सूरज,
ये तो ना उगने से थकता है
ना ढलने से डरता है.

सोचा था तुम चले जाओगे
तो ये भी मेरी तरह
बादलों की चादर में गुम,
उठने से इनकार करेगा.
मगर देखो ना,
कैसी चमकती धूप खिली है आँगन में!

सोचा था तुम चले जाओगे,
तो ये चिड़ियाँ मायूस सी,
मेरी तरह चहकना भूल जाएँगी.
शायद पेड़ो की डालियों में कही च्चिप जाएँगी.
मगर देखो ना,
ये तो नया ही कोई राग गाने लगी हैं.

सोचा था तुम चले जाओगे
तो तुम्हारे बाग़ीचे के फूल
मेरी ही तरह, तुम्हारी याद में मुरझा जाएँगे..
मगर देखो ना,
ये तो बरसात आने पर फिर खिल गये.

सोचा था तुम चले जाओगे,
तो सब कुछ बदल जाएगा..
मगर देखो ना,
सब कुछ तो दुनिया में वही है..
बस हम बदल गये.

My YouTube Channel for Poetry Recitations.

 

Hi there! If you’ve been following my poetry on my blog, I would love for you to subscribe to my new YouTube Channel where I’ll be posting my poetry recitations. For now, I’ve posted two in Hindi. Somehow I feel its much nicer to listen to Hindi poetry than read it.. Specially the younger generation of Hindi speakers who do connect to the language, but tend to be more comfortable reading English than Hindi. So this one’s for them!

Also, I’m wondering if my English recitations would be any good.. But I might give it a shot.
Please share your views/suggestions/ideas in the comment section of the videos and please like and share if you think its good enough.. Appreciation is always appreciated 😀

Also, if you want me to write on a particular topic, please don’t hesitate to suggest something.. I’ll be more than happy to put your ideas to words.

Cheers! xx

यह पल जो बीत जाएगा ..

कुछ बातें तुमसे करनी थी..
कुछ किस्से तुम्हे सुनाने थे.
एक नही, काई बार तुम्हे बताने थे..
जैसे तुम बताया करते थे..
उन्ही क़िस्सो पर बार बार तुम हस्ते थे..

बीतें पलों को याद करते थे..
ना जानते हुए की ये पल भी बीत जाएगा..
ना चाहते हुए, यह भी एक किस्सा बॅन जाएगा.

अब उन्ही क़िस्सो को याद करते हैं..
और फिर उन्हे दौहराते हैं..
जैसे तुम दुहरेया करते थे..

दो पल .

दो पल की ज़िंदगी के
दो पल हमें देदो.
ना ज़्यादा ना कम,
जो है वो हमें देदो.

यूँ तो हज़ारों साल जी लें तुम्हारे बिना,
मगर बिच्छाड़ने का अगर इरादा है,
तो ये जान अभी लेलो.

चलते रहे यूँही .

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Image source : Tumblr

चलते रहे यूँही,
ज़िंदगी के पन्ने भरते हुए.

कुछ डरते हुए,
कुछ पल-पल मरते हुए.

मिलते रहे यूँही,
अपने जैसे इंसानों को.

कुछ इन्सानी भेस में राक्शस,
कुछ इंसानी भेस में भगवानों को.

पहेलियों में पलते हैं ज़िंदगी की .

पहेलियों में पलते हैं हम ज़िंदगी की ।
रोज़ एक नई राह चुनने को बेक़रार,
पीछे छोड़ आए हैं कितने ही यार ।

कुछ कुचल कर गए दिल को,
कुछ दे गए अपनी ताक़त ।
आज भी बैठे सोचते हैं ,
कैसी थी वो उनकी चाहत ।

अभी अभी तो वक़्त को मुट्ठि में थामा था ।
अभी अभी तो बचपन का ज़माना था ।
एक पल में ही तक़दीरें बदल गयीं ।
हाथो़ं कि लकीरें बदल गयीं ।

कल ही तो उन्हें गले लगाया था ।
हाथों में उनके अपना हाथ थमाया था ।
फिर कैसे आज मूँद ली आँखें ?
सफ़ेद चादर में लिपटी हैं उनकी बाँहें ।

पहेलियों में पलते हैं हम ज़िंदगी की ।
रोज़ एक नए जवाब कि तलाश है ।
उफ़ ये ज़िंदगी कितनी बेहिसाब है!

नींद से जागे हम .

नींद से जागे हम,
एक रंगीन ख्वाब में.

दिन ढले, रंग बदले,
खुली आँखों से ख्वाब बुनते रहे.

एक-एक कर , हर एक ख्वाब टूटा.
एक-एक कर, हर एक साथ छूटा.

चेहरे की रौनक ढलती गयी.
ज़िंदगी से उम्मीद घटती गयी.

लौट कर नही आए जिन्हे आना था.
ख्वाबों का टूट जाना तो एक बहाना था.

नींद के इंतेज़ार मेी फिर रंगो को भूल गये.
गहरी नींद के इंतेज़ार में,
फिर हर सपने को भूल गये.

ज़िंदगी से हार कर,
दिलों को तोड़ गये.
हम नींद से जागे थे,
नींद में खो गये.